Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
गलसà¥à¤† को सामानà¥à¤¯ बोलचाल में गलफड़ा à¤à¥€ कहा जाता है। शिशॠरोग विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गलसà¥à¤† à¤à¤• वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ है, जो आसानी से फैलता है और शरीर के कई हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। किसी à¤à¥€ तरह के वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ में तापमान की महतà¥à¤¤à¥€ à¤à¥‚मिका रहती है। à¤à¤¸à¥‡ में छोटे बचà¥à¤šà¥‡ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के शिकार जलà¥à¤¦ हो जाते हैं। इन दिनों पड़ रही तेज सरà¥à¤¦à¥€ के कारण à¤à¤• से दूसरे बचà¥à¤šà¥‡ में यह वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ आसानी से पहà¥à¤‚च रहा है। गलसà¥à¤† मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से लार गà¥à¤°à¤‚थियों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है, जो कान और जबड़े के बीच में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• गाल के पीछे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होती हैं। गलसà¥à¤† लार गà¥à¤°à¤‚थियों की सूजन और दरà¥à¤¦ का करण बनता है। इस बीमारी में बचà¥à¤šà¥‡ के चेहरे पर à¤à¤• साइड से सूजन शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है, जो उपचार नहीं कराने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में दूसरे हिसà¥à¤¸à¥‡ तक पहà¥à¤‚च जाती है। इसका असर 6-7 दिन तक रहता है।
गलसà¥à¤†à¤•े कारण
इसकामà¥à¤–à¥à¤¯ कारण ममà¥à¤ªà¤¸ वायरल है और यह संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ लार, छींकने या खांसने तथा संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के साथ बरà¥à¤¤à¤¨ साà¤à¤¾ करने के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤• से दूसरे में आसानी से फैलता है। इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ आमतौर पर वायरस से संपरà¥à¤• के बाद 14 से 18 दिनों में होती है।
गलसà¥à¤†à¤•े लकà¥à¤·à¤£
गलसà¥à¤†à¤®à¥‡à¤‚ बहà¥à¤¤ ही हलà¥à¤•े लकà¥à¤·à¤£ देखने को मिलते हैं। इनमें बà¥à¤–ार, उलà¥à¤Ÿà¥€, गालों पर सूजन दिखाई देना, सिरदरà¥à¤¦, à¤à¥‚ख लगना, कमजोरी, चबाने और निगलने में दरà¥à¤¦ होना आदि शामिल हैं।
यहबरतें सावधानी
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गलसà¥à¤† à¤à¤• वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ है। à¤à¤¸à¥‡ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ लें। करीब à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में यह रोग समापà¥à¤¤ हो जाता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह से दरà¥à¤¦ निवारक दवा लेने से इससे होने वाले दरà¥à¤¦ काे कम किया जा सकता है। इसके अलावा रोगी को पूरा आराम कराना चाहिठतथा नरम आहार लें, ताकि अधिक चबाना नहीं पड़े। तरल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करें, खटà¥à¤Ÿà¥‡ फल खाने से बचे। वहीं रोग को फैलने से रोकने के लिठरोगी को अलग रखना घरेलू उपचार में शामिल है।
| --------------------------- | --------------------------- |